नफरतों के जहां में हमको प्यार की बस्तियां बसानी हैं, दूर रहना कोई कमाल नहीं, पास आओ तो कोई बात बने।

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली दोस्तो... वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते हैं।

कुछ इस अदा से निभाना है किरदार मेरा मुझको, जिन्हें मुहब्बत ना हो मुझसे वो नफरत भी ना कर सके।

ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा, मैं खुद तन्हा रहा पर दिल को तन्हा नहीं रखा, तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज रखे हैं, तुम्हारी नफरतों की पीड़ को जिंदा नहीं रखा।

तुझे प्यार भी तेरी औकात से ज्यादा किया था, अब बात नफरत की है तो नफरत ही सही।

अगर इतनी ही नफरत है हमसे तो, दिल से कुछ ऐसी दुआ करो, की आज ही तुम्हारी दुआ भी पूरी हो जाये, और हमारी ज़िन्दगी भी।

कभी उसने भी हमें मोहब्बत का पैगाम लिखा था, सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था, सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है,  जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।

उसने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया, कितने रिश्ते उसकी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ, कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है, कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ।

तुम नफरत करो या मोहब्बत, दोनों हमारे हक में बेहतर हैं, नफरत करोगे तो हम तुम्हारे दिमाग में, मोहब्बत करोगे तो दिल में बस जायेंगे।

खुदा सलामत रखना उन्हें, जो हमसे नफरत करते हैं , प्यार न सही नफरत ही सही, कुछ तो है जो वो हमसे करते हैं।

चला जाऊँगा मैं धुंध के बादल की तरह, देखते रह जाओगे मुझे पागल की तरह,  जब करते हो मुझसे इतनी नफरत तो क्यों, सजाते हो आँखो में मुझे काजल की तरह।

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